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वाकआउट : नाटक नौटंकी के लिए जनता के मन में अब कोई स्थान रिक्त नहीं !

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वाकआउट : नाटक नौटंकी के लिए जनता के मन में अब कोई स्थान रिक्त नहीं !

वाकआउट : नाटक नौटंकी के लिए जनता के मन में अब कोई स्थान रिक्त नहीं !
March 07
11:43 2018

कांग्रेस का यह वाकआउट संदेह, संभावनाओं और शक को आधार बनाकर किया गया, जो स्वस्थ लोकतंत्र के अनुरूप नहीं है। इसे विपक्ष की रचनात्मक भूमिका बिलकुल नहीं कहा जा सकता। विपक्ष को केवल विरोध के लिए विरोध नहीं करना चाहिए। लोग अब बहुत सयाने हो गए हैं, उनके मन में नाटक नौटंकी के लिए कोई स्थान रिक्त नहीं है। जनता विपक्ष से रचनात्मक और सकरात्मक भूमिका की उम्मीद करती है, विधानसभा के भीतर भी और विधानसभा के बाहर भी !

शिमला। बजट सत्र के पहले दिन काँग्रेस विधायक दल का वाकआउट समझ से परे है। इस वाकआउट का मुद्दा था, भू-अधिनियम की धारा 118 ! विपक्ष को शक हुआ कि मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर धारा 118 का सरलीकरण कर सकते हैं। इसके लिए सीएम के पिछले बयानों को आधार बनाया गया। यानी,पूरे शक के आधार पर ही यह वाकआउट किया गया।

यह तो “सागर कत्था काण्ड” जैसी बात हो गई। 1997 में वीरभद्र सिंह सरकार ने सागर कत्था उद्योग को खैर की लकड़ी आवंटन संबंधी एक फैसला केबिनेट की बैठक में लिया। यह निर्णय अमल में नहीं लाया गया और सरकार बदल गई। धूमल सरकार ने सत्ता में बैठने के बाद वीरभद्र सिंह के खिलाफ इस मामले को लेकर भ्र्ष्टाचार का मामला दर्ज कर लिया। तर्क यह दिया गया कि यदि कैबिनेट के निर्णय के अनुसार सागर कत्था उद्योग को खैर का आवंटन किया जाता तो सरकारी खजाने को दो करोड़ अस्सी लाख रुपए की चपत लगती।

अर्थात चपत नहीं लगी, फिर भी सालों जांच चली और आखिर में जैसा कि लग रहा था, अदालत ने केस खारिज कर दिया। इसी तरह का यह वाकआउट भी हुआ। मुख्यमंत्री ने धारा 118 को लेकर एक विचार रखा कि उद्योगों के विस्तार के लिए धारा 118 के सरलीकरण पर सरकार सोच सकती है। इसी मुद्दे पर कांग्रेस ने स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया और अंत में वाकआउट कर दिया। मुख़्यमंत्री ने इसपर टिप्पणी की कि कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री को नया नया काम मिला है। फिर भी देख लेना चाहिए कि विधायक दल में उनके साथ है कौन ?

कुलमिलाकर कांग्रेस का यह वाकआउट संदेह, संभावनाओं और शक को आधार बनाकर किया गया, जो स्वस्थ लोकतंत्र के अनुरूप नहीं है। इसे विपक्ष की रचनात्मक भूमिका बिलकुल नहीं कहा जा सकता। विपक्ष को केवल विरोध के लिए विरोध नहीं करना चाहिए। लोग अब बहुत सयाने हो गए हैं, उनके मन में नाटक नौटंकी के लिए कोई स्थान रिक्त नहीं है। जनता विपक्ष से रचनात्मक और सकरात्मक भूमिका की उम्मीद करती है, विधानसभा के भीतर भी और विधानसभा के बाहर भी !

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