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तीन दशकों बाद भी नहीं बन पाया स्वास्थ्य केन्द्र का भवन

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तीन दशकों बाद भी नहीं बन पाया स्वास्थ्य केन्द्र का भवन

तीन दशकों बाद भी नहीं बन पाया स्वास्थ्य केन्द्र का भवन
November 15
17:06 2017

धर्मपुर(सुशील शर्मा)। धर्मपुर क्षेत्र की सकलाना पंचायत में आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र को तीन दशकों बाद भी अपना भवन नसीब नहीं हो सका है। वर्ष 1990 में सकलाना पंचायत के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा के लिए आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना की गई थी लेकिन करीब तीन दशक बीत जाने के बाद भी इस केंद्र को अपना भवन नसीब नहीं हो पाया है।

क्षेत्र के लोगों की आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए भवन निर्माण की मांग वर्षों से चली आ रही है। हालांकि सरकार ने 20 लाख रुपए लोक निर्माण विभाग को बजट कब का प्रदान कर दिया है। परंतु पिछले 2 वर्षों से भवन का निर्माण बीच मझधार में लटक गया है। भवन निर्माण शुरु करवाने को लेकर राजनेताओं से लेकर विभाग भी पूर्णतय: नाकाम साबित हुआ है।

यहां तक कि जनता को इस बात का रोष हैं की इस भवन का नींव पत्थर रखने वाले धर्मपुर के विधायक महेंद्र सिंह ठाकुर भी इसका निर्माण अधर में लटक जाने बाद भी पूर्णतया चुप रहे।

उन्होंने न तो इसे लेकर सरकार को कभी भी घेरा ओर न ही वे विभाग पर कोई दबाब बना सके। यही कारण हैं की पिछले 27 वर्षों से पंचायत में आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र एक पुराने जर्जर भवन में चलाया जा रहा है।

गौरतलब है कि इस आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र भवन को लेकर ग्रामीणों ने 5 बिस्वा जमीन विभाग के नाम दान दी थी। पूर्व भाजपा सरकार ने बाकायदा इसके लिए 20 लाख बजट भी एकमुश्त स्वीकृत किया था। इसके बावजूद भवन निर्माण न होना कई सवालों के घेरे में है। भवन के निर्माण का शिलान्यास पूर्व परिवहन मंत्री और धर्मपुर के विधायक महेंद्र सिंह ठाकुर ने 19 फरवरी 2011 में किया था।

उन्होंने इसके निर्माण को लेकर बजट भी 10 लाख जमा करवा दिया था। लोक निर्माण विभाग ने भवन के निर्माण को लेकर टेंडर जारी कर ठेकेदार के माध्यम से निर्माण भी शुरू करवा दिया था, परंतु अब 2 वर्षों से ठेकेदार ने काम बीच मझदार में ही छोड़ दिया है। हैरानी इस बात की हैं की आज तक विभाग न तो इसका टेंडर कैंसिल कर पाया और न ही ठेकेदार को पेनल्टी लगा पाया है।

उधर, लोक निर्माण विभाग के मढ़ी डिवीजन के एसडीओ अनिल शर्मा ने कहा कि आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र सकलाना के भवन को लेकर 20 लाख 64 हजार रुपए का बजट मिला है। परंतु ठेकेदार द्वारा कार्य छोड़ देने से भवन का काम लटका हुआ है। डेढ़ साल से ठेकेदार को कई बार लिखा जा चुका है। अब चीफ ऑफिस से टेंडर कैंसिल कर दोबारा नए सिरे से टेंडर लगाने की अनुमति मिल गई है। काम लटकाने वाले ठेकेदार के विरुद्ध विभागीय स्तर पर पेनल्टी भी लगाई जाएगी।

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