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वोडाफोन और आईडिया में विलय हुआ, अब क्या असर पड़ेगा ग्राहकों पर

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वोडाफोन और आईडिया में विलय हुआ, अब क्या असर पड़ेगा ग्राहकों पर

वोडाफोन और आईडिया में विलय हुआ, अब क्या असर पड़ेगा ग्राहकों पर
March 20
12:22 2017

नई दिल्ली। कुमार मंगलम बिड़ला के स्वामित्व वाली देश की तीसरे नंबर की टेलिकॉम कंपनी आइडिया सेल्युलर ने वोडाफोन इंडिया के साथ विलय का ऐलान कर दिया है। दोनों कंपनियों ने भारत में अपने बिजनेस को साथ लाने का फैसला किया है। दोनों अब देश में सबसे बड़े टेलीकॉम प्रोवाइडर के तौर पर जदाने जाएंगे। कंपनी ने सोमवार को बताया कि उसके बोर्ड ने इस विलय-प्रस्ताव पर मुहर लगा दी। इसके तहत वोडाफोन इंडिया और इसके पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी वोडाफोन मोबाइल सर्विसेज लिमिटेड और आदित्य बिड़ला ग्रुप के आइडिया सेल्युलर का विलय हो जाएगा और नई कंपनी भारती एयरटेल को पछाडक़र देश की सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी बन जाएगी।

यह हुई है डील

जानकारी के मुताबिक, दोनों कंपनियों के बीच पिछले छह महीने से मर्जर की बात चल रही थी जो अब जाकर पूरी हुई है। वोडाफोन और आदित्य बिड़ला ग्रुप की कंपनी आइडिया में मर्जर की हिस्सेदारी भी तय हो गई है। बताया जा रहा है कि वोडाफोन कंबाइंड इनटाइटी का 45 फीसदी अपने पास रखेगी, वहीं आइडिया के पास इसकी 26 फीसदी हिस्सेदारी होगी। आगे जाकर आदित्य बिड़ला ग्रुप और वोडाफोन का हिस्सा बराबर हो जाएगा। आइडिया का वैल्युएशन 72,200 करोड़ रुपया आंका गया है। फाइलिंग के मुताबिक, एबी ग्रुप के पास 130 रुपये प्रति शेयर की दर से नई कंपनी के 9.5 प्रतिशत खरीदने का अधिकार होगा। इस ऐलान के बाद आइडिया के शेयरों में 2.5 फीसदी का उछाल आ गया। बता दें कि जियो के आने के बाद टेलिकॉम सेक्टर में हाहाकार मचा हुआ है।

क्या पड़ेगा असर?

पहले यह खबर थी कि रिलांस जियो का मुकाबला करने के लिए आइडिया और वोडाफोन का मर्जर होने जा रहा है, इससे देशभर में फैले आइडिया और वोडाफोन से बड़ी संख्या में लोगों की सेवाएं समाप्त हो सकती हैं। दोनों कंपनियों से जुड़े लोगों का कहना है कि देश में तीन लाख से ज्यादा लोग टेलिकॉम उद्योग में नौकरी करते हैं, लेकिन अगले 18 महीने की मर्जर प्रक्रिया के दौरान टेलिकॉम उद्योग से दस से 25 हजार लोगों की नौकरियों पर तलवार लटक रही है।
मार्केट छोड़ सकती हैं छोटी कंपनियां
आज के ऐलान के मुताबिक, आइडिया और वोडाफोन की विलय प्रक्रिया अगले साल पूरी हो जाएगी। ब्रोकरेज कंपनी सीएलएसए की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नई कंपनी का रेवेन्यू 80,000 करोड़ से भी ज्यादा का होगा जो देश की टेलिकॉम इंडस्ट्री के कुल रेवेन्यू का 43 प्रतिशत होगा। इसके साथ ही, नई कंपनी के पास भारतीय बाजार के कुल 40 प्रतिशत मोबाइल सब्सक्राइबर्स होंगे। इतना ही नहीं, कुल आवंटित स्पेक्ट्रम का 25 प्रतिशत हिस्सा अकेले इसी कंपनी के पास होगा। ऐसे में इसे 1 प्रतिशत स्पेक्ट्रम बेचना होगा ताकि इसकी सीमा से जुड़े नियम का पालन हो सके।

विलय में वोडाफोन और आइडिया के सभी शेयरों का विलय होगा, सिर्फ इंडस टावर्स में वोडाफोन के 42 प्रतिशत शेयरों को छोडक़र। आइडिया के नए शेयरों को वोडाफोन में जारी करने के साथ विलय लागू हो जाएगा और वोडाफोन इंडिया अपनी पैरंट कंपनी से अलग हो जाएगा। देश के टेलिकॉम मार्केट में पिछले साल आई कंपनी रिलायंस जियो बड़ी तेजी से पांव जमा रही है। कंपनी ने पहले वेलकम ऑफर और फिर हैपी न्यू इयर ऑफर के तहत फ्री वॉइस और डेटा सर्विसेज देकर बड़े पैमाने पर ग्राहकों को जोडऩे में कामयाब रही है।

पिछले महीने भारती एयरटेल ने भी शेयर बाजार को सूचित किया था कि वह टेलिनॉर इंडिया के ऐसेट्स खरीदेगा। नॉर्वे की कंपनी टेलिनॉर ने तब भारतीय बाजार से अपना कारोबार समेटने जा रही है जब रिलायंस जियो ने 10 करोड़ ग्राहकों को अपने साथ जोडऩे में कामयाब हो गया है। वोडाफोन और आइडिया के विलय से बनी नई कंपनी भारत की सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी हो जाएगी। अभी भारती एयरटेल देश की सबसे बड़ी कंपनी है। सूत्रों के मुताबिक, वोडाफोन मर्जर के बाद बनने वाली कंपनी में सीईओ और सीएफओ दोनों पद मांग रहा है। उसे नई कंपनी का चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला को घोषित करने से कोई ऐतराज नहीं होगा।

इस कंपनी का सीईओ वोडाफोन पीएलसी के किसी ग्लोबल एग्जिक्युटिव को बनाया जा सकता है, यह जानकारी दो सूत्रों ने दे ही। एक तीसरे सूत्र ने बताया कि टॉप लेवल रिक्रूट की तलाश शुरू भी हो गई है। वोडाफोन पीएलसी और आइडिया सेल्युलर पर मालिकाना हक रखने वाले आदित्य बिड़ला ग्रुप ने इस मामले में इकनॉमिक टाइम्स के सवालों के जवाब नहीं दिए।

पहले एक रिपोर्ट में इकनॉमिक टाइम्स ने अनुमान लगाया था कि कंसॉलिडेशन की वजह से टेलिकॉम इंडस्ट्री में 1,00,000 रोजगार कम हो सकते हैं। ये नौकरियां कई टेलिकॉम ऑपरेटर और इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनियों में खत्म हो सकती हैं। इस बीच, वोडाफोन ने एनुअल ऑफसाइट को टाल दिया है, जिसे मार्च महीने की शुरुआत में फाइनल किया जाता है और यह अप्रैल के आखिर में होता है। कुछ ब्रैंड और मार्केटिंग खर्चों को भी रोक दिया गया है।

इसी साल वोडाफोन इंडिया ने सीनियर मैनेजमेंट के रिपोर्टिंग स्ट्रक्चर में बदलाव किया था। कंपनी ने चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर बालेश शर्मा को रिपोर्टिंग अथॉरिटी बनाया था। पहले कंपनी के सीनियर एग्जिक्युटिव्स वोडाफोन इंडिया के सीईओ को रिपोर्ट करते थे। अभी दोनों कंपनियों ने एक्टिव इन्फ्रास्ट्रक्चर को शेयर करने का फैसला किया है। इसमें वायरलेस इक्विपमेंट भी शामिल हैं। इसका मतलब यह है कि कोई मर्जर होता है तो उसमें बहुत दिक्कत नहीं होगी।

वोडाफोन और आदित्य बिड़ला ग्रुप ने जनवरी में कहा था कि वे इंडस टावर में वोडाफोन के 42 फीसदी हिस्सेदारी को छोडक़र दोनों कंपनियों के सभी एसेट्स को मर्ज करने की संभावना पर काम कर रहे हैं। अगर मर्जर के बाद दोनों कंपनियों को बराबर के राइट्स दिए जाते हैं तो उसके लिए आइडिया के नए शेयर वोडाफोन को इशू करने होंगे, जिससे ब्रिटिश वोडाफोन पीएलसी खुद को वोडाफोन इंडिया से अलग कर लेगी।

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